अगर आपने कभी ब्रेकआउट्स के बारे में सुना नहीं है तो आप शायद सोच रहे होंगे कि यह जेल से बाहर कैसे निकलें की मास्टर क्लास है। खैर, आप करीब हैं।

तो ब्रेक आउट क्या होता है?
एक ब्रेकआउट और कुछ नहीं है, बल्कि एक स्टॉक है जो अपने पिछले सपोर्ट या रेजिस्टेंस लेवल के बीच बढ़ी हुई मात्रा के साथ जेल्ड ज़ोन से बाहर निकल रहा है। एक ब्रेक आउट ट्रेडर सामान्य तौर से स्टॉक की कीमत के

रेजिस्टेंस के ऊपर टूटने के बाद लॉन्ग पोजीशन में आता है और स्टॉक की कीमत के रेजिस्टेंस के नीचे टूटने के बाद शॉर्ट पोजीशन में।

फिगर 1: ब्रेकआउट क्या होता है?

जब मार्केट की बात आती है तो ब्रेकआउट्स कई ट्रेडर्स द्वारा उपयोग किए गए प्रसिद्ध तरीकों में से एक है। चाहें आप इंट्राडे, डेली या वीकली चार्ट्स का उपयोग करते हों ब्रेक आउट्स एक बढ़िया स्ट्राइटेजि है क्योंकि इसके कोन्सेप्ट्स सभी जगह लगाए जा सकते हैं।

ब्रेकआउट्स क्यों?

इस स्ट्राइटेजी के स्पष्ट फाड़े हैं, जैसे-

·  ब्रेकआउट्स, मुख्य प्राइज़ ट्रेंड्स के प्रारम्भिक बिन्दु हैं।

·  कोई भी ट्रेंड के शुरुआत में पोजीशन ले सकता है।

·  यह अस्थिरता में वृद्धि को भी दर्शाता है,जो व्यापारियों को स्ट्रैटेजी बनाने में मदद कर सकता है और  सीमित डाउनसाइड जोखिम।

सोचने के लिए बिन्दु

· इससे पहले कि हम और गहराई में जाये, यदि आप ब्रेकआउट्स में सफल ट्रेड करना चाहते हैं तो कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु हैं जो आपको याद रखने होंगे। किसी स्टॉक के लंबे समय तक ट्रेडिंग रेंज में रहने के बाद ब्रेक आउट्स होते हैं। चाहे आप एक चैनल में स्टॉक को देखें (फिगर-2) या हॉरिजॉन्टल सपोर्ट्स और रेजिस्टेंसेस के बीच (फिगर 3), जीतने ज़्यादा पहले टच होंगे उतना ही मजबूत ब्रेक डाउन होगा।

· स्टॉक को रेंज में कम मात्रा में ट्रेड करना चाहिए।

· ब्रेक आउट को वैध माना जाने के लिए मजबूत वॉल्यूम पर होना चाहिए 20 दिन के वॉल्यूम एसएमए से कम से कम दो गुना अधिक।

· ब्रेकआउट को चैनल,रेक़्टैंगल, ट्रायएंगल  आदि जैसे स्पष्ट पैटर्न में होना चाहिए और इसका मार्केट ट्रेंड के साथ-साथ चलना बेहतर है।

· यदि एक स्टॉक सपोर्ट या रेजिस्टेंस से लंबे गैप से ब्रेक आउट हुआ है तो स्टॉक का पीछा करने से बेहतर इसके पुलबैक का इंतज़ार करना होगा। ऐसे ट्रेड्स में आपके लिए रिवार्ड से ज़्यादा रिस्क हो सकती है।  

· एक ट्रेडर के रूप में आपको धैर्य रखना चाहिए और ब्रेक आउट की उम्मीद में इन ट्रेड्स में बहुत जल्दी प्रवेश करने से बचना चाहिए।

फिगर 2: एक डाउनवर्ड चैनल में 3 महीने रहने के बाद इन्फोसिस कंसॉलीडेशन से बाहर हो गई

फिगर 3 - 4 महीने के कंसॉलीडेशन के बाद रिलायंस रेजिस्टेंस लाइन से ब्रेक आउट हुआ

ब्रेक आउट ट्रेडिंग की चुनौतियाँ
ब्रेक आउट ट्रेडिंग की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बहुत सारे झूठे ब्रेकआउट हैं। कई ब्रेक आउट्स निर्णायक भी नहीं होते क्योंकि मार्केट दूसरे कंसॉलीडेशन ज़ोन में प्रवेश कर सकता है। ऐसा तब होता है जब ब्रेक आउट्स में शक्ति नहीं होती। एक ट्रेडर के लिए और भी अधिक कठिन सिनेरियों तब होता है जब मार्केट एक दिशा में ब्रेक आउट करता है और जल्दी से पलट कर दूसरी दिशा में और ज़्यादा मजबूती से ब्रेक आउट करता है। ऐसे मामलों में ट्रेडर को रुकना और पलटना चाहिए लेकिन अधिकांश लोग ऐसा करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।

ब्रेक आउट्स के लिए स्कैनर  
ब्रेकआउट्स का पता लगाने के लिए आप स्कैनर का उपयोग करके आप कई नुकसानों से बच सकते हैं। स्कैनर एक ऐसा उत्तम टूल है जिसमें आप अपनी सभी कंडीशंस डाल सकते हैं और मशीन को कठिन महनत करने दें।  यह आपके काम को बहुत आसान बना देता है क्योंकि अब आपके पास विश्लेषण करने और अपने ट्रेड चुनने के लिए बहुत कम चार्ट्स बचते हैं। मार्केट पल्स स्कैनर में कई स्कैन हैं जिन्हें आप आसानी से चला सकते हैं जो आपको स्टॉक को शॉर्ट लिस्ट करने में मदद करेंगे।

मैं अगले कुछ आर्टिकल्स में आपको सबसे अच्छे मार्केट स्कैनर्स से परिचित कराऊंगा। यह स्पेस देखते रहें।