इंडिकेटर का आधार

एक ही इंडिकेटर में प्राइज़ और वॉल्यूम की जानकारी को साथ लाने के लिए मार्क चैकिन ने चैकिन मनी फ़्लो (सीएमएफ़) का विकास किया। यह इस विचार पर आधारित है कि मूल्य (प्राइज़) मात्रा (वॉल्यूम) का अनुसरण करता है।

इंडिकेटर का क़ॉंसेप्ट संग्रह (अक्युमुलेशन) या  वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) पर आधारित है मतलब जिस दिन स्टॉक अपने मिडपॉइंट [(हाई+लो)/2] से ऊपर बंद होता है तो उस दिन संग्रह (अक्युमुलेशन) हुआ और यदि यह मिडपॉइंट से नीचे बंद होता है तो उस दिन वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) हुआ। आगे बढ़ते हुए, क्लोजिंग पॉइंट, हाई के जितना ज़्यादा पास होगा,उतना ज़्यादा संग्रह (अक्युमुलेशन) हुआ है। इसके विपरीत,क्लोजिंग पॉइंट जितना ज़्यादा लो के पास होगा, उतना ज़्यादा वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) हुआ है।

·  प्राइज़ मूव की संभावित स्थिरता का निर्धारण करने के लिए चैकिन मनी फ्लो दो महत्वपूर्ण कारकों को देखता है:

  • क्या इस मूव के दौरान स्टॉक मजबूत बंद हुआ है?
  • क्या मूव अपेक्षाकृत उच्च या निम्न वॉल्यूम पर हुआ है?

गणना

चैकिन मनी फ़्लो (सीएमएफ़) की गणना के लिए 3 स्टेप्स हैं।

1.  पहले हर पीरियड के लिए मनी फ़्लो मल्टीप्लायर की गणना करें।

·  यह मल्टीप्लायर तब पॉज़िटिव होता है जब क्लोज़ पीरियड के हाई-लो रेंज के ऊपरी आधे हिस्से में होता है और जब यह पीरियड के हाई-लो रेंज के निचले आधे हिस्से में होता है तो नेगेटिव होता है।

2. मनी फ़्लो वॉल्यूम निकालने के लिए मनी फ़्लो मल्टीप्लायर को पीरियड की वॉल्यूम से मल्टीपलाय करें।

3. तीसरा, 20 पीरियड की मनी फ़्लो वॉल्यूम को जोडें और उसे 20 पीरियड की वॉल्यूम के योग से विभाजित करें।

इंटरप्रिटेशन

चैकिन मनी फ़्लो (सीएमएफ़) एक ऑसिलेटर है जो -1 और +1 के बीच झूलता है। यह इंडिकेटर शायद ही कभी इन चरम सीमाओं तक जाता है। 20 दिनों के चैकिन मनी फ़्लो को +1(-1) तक पहुँचने के लिए लगातार 20 हाई (लो) पर क्लोज़ होना होगा। आम तौर से यह ऑसिलेटर 0 को सेंटर लाइन मानते हुए +0.50 और -0.50 के बीच झूलता है।

यह इंडिकेटर कैसे काम करता है?

·  ज़ीरो लाइंके ऊपर की सीएमएफ़ वैल्यू मार्केट में मजबूती का संकेत है और ज़ीरो लाइन से नीचे की वैल्यू मार्केट में कमजोरी का संकेत है।

·  सीएमएफ़ के ट्रेंड लाइंस या सपोर्ट और रेजिस्टेंस से प्राइज़ ब्रेक आउट की दिशा की पुष्टि होने का इंतज़ार करें। उदाहरण के लिए,यदि प्राइज़ रेजिस्टेंस से ऊपर की ओर ब्रेक आउट होती है तो ब्रेक आउट दिशा की पुष्टि के लिए सीएमएफ़ की एक पॉज़िटिव वैल्यू का इंतज़ार करें।

·  सीएमएफ़ सेल (बेचने का) सिग्नल तब आता है जब प्राइज़ एक्शन ओवर बॉट क्षेत्रों में एक ऊंचा हाई बनाता है जिसमें सीएमएफ़ एक नीचे हाई पर होता है और गिरना शुरू करता है।

·  सीएमएफ़ बाय (खरीदने का) सिग्नल तब होता है जब प्राइज़ एक्शन ओवर सोल्ड क्षेत्रों मेंसीएमएफ़ के एक ऊंचे लो से अलग होना और बढ़ना शुरू करने के साथ एक नीचा लो विकसित करता है।

कमी

सीएमएफ़ में एक बड़ी खामी है  कि यह धारणा बनाता है कि प्राइजेस एक सेशन से अगले में आसानी से जाती हैं। लेकिन वास्तविकता में, मार्केट में गैप्स होती हैं जहां एक नए ट्रेडिंग डे पर प्राइजेस एक बिलकुल नई रेंज में खुलती और ट्रेड करती हैं। सीएमएफ़ में इन गैप्स को पकड़ने का कोई तरीका नहीं है और इसलिए वह समकालीन नहीं रह पाता है।