परिवर्तन शीलता एक ट्रेडर की सबसे अच्छी दोस्त होती है क्योंकि व्यापार के अवसर बनाने के लिए ट्रेडर्स को मार्केट के चलने और ट्रेंड्स बनाने की आवश्यकता होती है।इसीलिए उनके विश्लेषण में परिवर्तनशीलता(वॉलेटिलिटी) के इंडिकेटर्स का उपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।

आज मैं आपका ध्यान ऐसे ही एक वॉलेटिलिटी इंडिकेटर एवरेज ट्रू रेंज (एटीआर) की ओर मोड़ना चाहता हूं।

एटीआर का आरंभ?
व्यापारी, लेखक, और तकनीशियन जे. वेल्स वाइल्डर ने 1970 के दशक में एवरेज ट्रू रेंज( एटीआर) का विकास किया। वाइल्डर का मानना ​​था कि  एक निश्चित अवधि के लिए उच्च और निम्न के बीच का अंतर  चाहे वह इंट्राडे, डेली, वीकली या मंथली हो वह सीधे  वॉलेटिलिटी के आनुपातिक होता है, और यह रेंज एक  ट्रेंड का संकेत  देती है।

यदि एक स्टॉक की वोलैटिलिटी बढ़ती है, तो यह एक ट्रेंड में प्रवेश कर रहा है और यदि यह कम होती है तो यह उलट का संकेत देता है।उन्होंने इसमें आगे सुधार करते हुए उन्होंने खुलने की कीमत के बजाय पिछले दिन के बंद होने की कीमत में आए बदलावों को शामिल किया और इसे ट्रू रेंज कहा।आफ्टर-अवर्स के बाद की ऐसी घोषणाएं जो अगले दिन मार्केट के ऊंचा या नीचा खुलने के लिए जिम्मेदार हो सकती हैं वे इसमें शामिल नहीं होंगी। इससे उस दिन की कीमत का रेंज बढ़ जाएगा और उच्च स्थिरता ट्रू रेंज में शामिल हो जाएगी।

अस्थिर समय के दौरान कुछ स्टॉक्स और कमोडिटीज के लिए यह महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, एक स्टॉक जो ₹100 पर बंद हुआ और अगले दिन ₹110 पर खुला और रुपए 110 और  रुपए 115 के बीच ट्रेड हुआ वह केवल रुपए 5 की रेंज प्रदर्शित करेगा जबकि टॉक असल में पिछले दिन की तुलना में रुपए 15 बढ़ा है।

एवरेज ट्रू रेंज क्या है ( एटीआर)?
ट्रू रेंज की गणना करतेसमयआप तीन अलग-अलग सिनेरियोज़ देख सकते हैं।

ट्रू रेंज हमेशा एक  एब्सल्यूट वैल्यू के रूप में  कैलकुलेट की जाती है जिसका अर्थ है कि छोटी कीमत ( ओपनिंग या क्लोजिंग) को बड़ी में से घटाया जाता है इसलिए हमेशा एक पॉजिटिव संख्या मिलती है और एटीआर और कुछ नहीं बल्कि विशिष्ट अवधि की ट्रू रेंजेस का औसत है, जिसका डिफॉल्ट 14 है।

जैसा कि आप नीचे दिए गए फिगर में देख सकते हैं, ट्रू रेंज आवश्यक रूप से कोई भविष्यवाणी नहीं करती है

लेकिन गतिविधि की चरम सीमाएं  एक स्टॉक की गति में बदलाव दर्शाती हैं( सर्कल किए हुए प्वाइंट्स)। एटीआर से मिलने वाला एकमात्र संकेत यह है की उच्चता का अर्थ यह हो सकता है कि स्टॉक ट्रेंड कर रहा है और और नीचा एटीआर कीमतों के ठोस होने का संकेत है। चाहे स्टॉक ऊपर या नीचे ट्रेंड कर रहा हो, रेंज हमेशा पॉजिटिव होती है।ऐसा इसलिए है क्योंकि एटीआर का उपयोग एक चाल या ब्रेकआउट की पुष्टि करने के लिए की पुष्टि करने के लिए किया जा सकता है।

ट्रेडर्स एटीआर का उपयोग कैसे कर सकते हैं?
डे ट्रेडर्स एटीआर का उपयोग लाभ के लक्ष्य व्यक्त करने के लिए कर सकते हैं और यह जांचने के लिए भी कि  एक ट्रेड किया जाना चाहिए।

एसबीआईएन के 5 मिनट के नीचे दिए गए चार्ट को देखें। स्टॉकके डेली चार्ट पर 10 का एटीआर (14) है।23 मई को यह रुपए 342.40 के अपने पिछले अंतर से खुलता है और ट्रेडिंग के पहले 15 मिनटों में ही रुपए 358.50 के उच्च तक पहुंच जाता है। कीमत पहले ही अपने सामान्य से 60% अधिक चल चुकी है।( रुपए 10 के एटीआर की तुलना में रुपए 16 ज्यादा)

अब, मान लीजिए कि ट्रेडर को अपनी स्ट्रैटेजी से खरीदारी का संकेत मिलता है। हालांकि खरीद संकेत वैध हो सकता है, लेकिन यह शर्त लगाना कि मूल्य का ऊपर जाना जारी रहेगा और रेंज को आगे भी बढ़ाएगा यह एक बुद्धिमान निर्णय नहीं होगा। ट्रेड लेना सफल हो सकता है। चूंकि कीमत पहले से ही सामान्य रूप से अधिक बढ़ गई है, कीमत के गिरने या पहले से स्थापित मूल्य सीमा में व्यापार करने की अधिक संभावना है। और एसबीआईएन के साथ भी यही हुआ है। स्टॉक मामूली रूप से रु. 5 से बढ़ा और फिर जल्दी ही रु. 25 गिरकर दिन के नीचे  रु. 339 पर पहुँच गया।

खरीदते समय जब कीमत डेली रेंज के पास हो- और रेंज औसत से परे- उपयुक्त नहीं है, इस मामले में यह मानते हुए कि आपकी स्ट्रेटजी में एक वैध ट्रेड सिग्नल आता है बेचना या कम करना एक बेहतर विकल्प है।

एक दूसरा मुख्य बिंदु जो मैं सामने लाना चाह रहा हूं वह है कि एंट्री और एग्जिट केवल एटीआर पर आधारित नहीं होना चाहिए। एटीआर केवल एक अतिरिक्त टूल है जिसे एक स्ट्रैटेजी के साथ ट्रेड्स छानने के लिए उपयोग किया जाता है।उदाहरण के लिए, ऊपर की स्थिति में, क्योंकि कीमत बढ़ गई है और दैनिक सीमा सामान्य से बड़ी है किसी व्यापारी को बेचना या कम नहीं करना चाहिए। ट्रेडर की स्ट्रैटेजी के आधार पर यदि बेचने का सिग्नल आता है तब ही एटीआर ट्रेड की पुष्टि करने में सहायक होता है।

इंट्राडे ट्रेडर्स सावधान हो जाएं
यदि एक ट्रेडर  इंट्राडे चार्ट पर एटीआर का उपयोग करता है, विशेषतः 1 मिनट से 5 मिनट की रेंज में तो आपको सचेत हो जाना चाहिए की मार्केट खुलने के ठीक बाद  एटीआर ऊपर की ओर स्पाइक होगी।  इसीलिए मार्केट खुलने का समय दिन का सबसे अधिक समय होता है, गैप और तीखे मूव्स से 5 मिनट या उससे कम टाइम फ्रेम वाले चार्ट्स एटीआर में बड़ी वृद्धि दिखाते हैं। खुलने के समय के स्पाइक के बाद, एटीआर दिन का अधिकांश समय कम होते हुए बिताती है।

अपने ट्रेड्स पर यथार्थवादी लक्ष्य स्थापित करना
यदि हम ऊपर दिए हुए जबलफूड चार्ट को देखते हैं और मान लीजिए आपको 28 को सुबह 12:00 बजे एक छोटा ट्रेड मिलता है। कीमत 1345 पर है और 3 मिनट चार्ट पर एटीआर लगभग 2 है। एटीआर के आधार पर व्यक्ति यह उम्मीद कर सकता है कि यदि वह  स्टॉक में रुपए 30 की गिरावट की उम्मीद कर रहा है तो ज्यादा नहीं तो कम से कम 45 मिनट ऐसा होने में लगेंगे।

इस प्रकार का विश्लेषण ट्रेडर को क्या हो सकता है और क्या नहीं की एक वास्तविक उम्मीद करने में मदद करता है। ट्रेडर्स की यह सोचने की प्रवृत्ति है कि जैसे ही वे ट्रेड में आएंगे, कीमतें जादुई रूप से उनके प्रॉफिट के लक्ष्य तक बढ़ जाएंगी।

एटीआर का अध्ययन कीमत की असली गति दर्शाता है।  अपना वांछित लाभ( रुपए 30) ले, इसे एटीआर(2) से विभाजित करें और यह बाढ़ की न्यूनतम संख्या( 3 मिनट के 15 बार= 45 मिनट) है जो कीमत को लाभ के लक्ष्य तक पहुंचने में लगेगा।

हालांकि एटीआर पूरे दिन बदलती रहती है फिर भी, यह हम कीमत के कितनी दूर जाने की उम्मीद कर सकते हैं और इसमें कितना समय लगेगा, का बढ़िया अनुमान है।

पिछले स्टॉप्स और एनवेलप्स
एक ट्रेलिंग लॉस इंडिकेटर के रूप में उपयोग करने के लिए भी एटीआर एक बढ़िया इंडिकेटर है। इस सीरीज में हमने पहले पैराबोलिक स्टॉप एंड रिवर्स ( पीएसएआर) का उपयोग किया है।
आने वाले हफ्ते में हम देखेंगे कि कैसे एक प्रसिद्ध इंडिकेटर सुपरट्रेंड भी एटीआर का डेरिवेटिव है। इस सीरीज में आगे हम देखेंगे कि एटीआर का एक और डेरिवेटिव, केल्टनर चैनल नाम का  एनवेलप, अच्छे ट्रेडिंग परिणाम उत्पन्न करने के लिए अन्य इंडिकेटर्स के साथ कंबाइन करने योग्य बेहतरीन इंडिकेटर है।मिलते हैं अगले हफ्ते।