पिछले हफ्ते ऑन बैलेंस इंडिकेटर (ओबीवी) के साथ हमने देखा कि ट्रेडर्स के लिए प्राइज़ की चाल को रोकने में कैसे वॉल्यूम एक पावरफुल पॉँइंटर हो सकता है।

इंडिकेटर क़ॉम्बिनेशंस को सेट करने की अपनी इस आखरी पेशकश में हम एक दूसरा पावरफुल कॉम्बिनेशन देखेंगे-

  • सुपरट्रेंड और
  • मानी फ़्लो इंडेक्स (एमएफ़आई), एक और ऑसिलेटर जो वॉल्यूम के साथ प्राइज़ को ट्रैक करता है।

हमने पहले इस सिरीज़ के आर्टिकल4 और आर्टिकल 5 में गहराई से कवर किया है। तो पहले एमएफ़आई को समझते हैं और देखते हैं कि कैसे हम इसे अपनी स्ट्रैटेजी में मिला सकते हैं।

मनी फ़्लो इंडेक्स

मनी फ़्लो इंडेक्स एक विशिष्ट (0 से 100 के बीच) तक चलनेवाला ऑसिलेटर है जो ओवर बॉट या ओवर सोल्ड सिक्योरिटीज की पहचान करने के लिए प्राइज़ और वॉल्यूम का उपयोग करता है। वॉल्यूम को शामिल करनेवाले मोमेंटम ऑसिलेटर के रूप में एमएफ़आई रिवर्सल्स और प्राइज़ की चरम सीमाओं को पहचानने में बढ़िया काम करता है।

आरएसआई के साथ तुलना

जैसा कि एमएफ़आई केवल प्राइज़ के विपरीत प्राइज़ और वॉल्यूम दोनों का डेटा शामिल करता है तो इसे वॉल्यूम-वेटेड आरएसआई कहा जा सकता है।

इस तुलना का कारण यह है कि एमएफ़आई, आरएसआई के जैसे ही फॉर्मुले का उपयोग करता है। आरएसआई एवरेज लॉस से एवरेज प्रॉफ़िट के रेशो का उपयोग करता है, लेकिन,एमएफ़आई, में पॉज़िटिव मनी फ्लो की गणना करने और नेगेटिव फॉर्मुले के लिए प्राइज़ और वॉल्यूम का प्रॉडक्ट शामिल होता है।

फॉर्मुला

इंटरप्रिटेशन

1- प्राइज़ की चरम सीमा पहचानने के लिए ओवर बॉट और ओवर सोल्ड लेवल्स का उपयोग किया जा सकता है। आम तौर पर 80 से ऊपर के एमएफ़आई को ओवर बॉट माना जाता है और 20 से नीचे के एमएफ़आई को ओवर सोल्ड। हालांकि, मजबूत ट्रेंड्स में लेवल्स लंबी अवधि के लिए चरम पर रह सकते हैं।

2- डायवर्जेंसेस और फेलियर स्विंग्स उच्च प्रोबैबिलिटी सिगनल्स बना सकते हैं।

  • एक बुलिश फेलियर स्विंग तब बंता है जब एमएफ़आई, 20 के नीचे ओवर सोल्ड हो जाता है, 20 से ऊपर जाता है, 20 के ऊपर पुलबैक पर रुकता है और अपने पहले के रिएक्शन हाई पर ब्रेक करता है।
  • एक बियरिश फेलियर स्विंग तब बनता है जब एमएफ़आई 80 के ऊपर ओवर बॉट होता है, 80 से नीचे गिरता है, एक बाउंस में 80 के ऊपर उछलने में असफल होता है और फिर पहले के रिएक्शन लो पर ब्रेक करता है।

सुपरट्रेंड और मनी फ़्लो इंडेक्स के साथ ट्रेडिंग सिस्टम

यह एक ट्रेंड का पीछा करनेवाला सिस्टम है जिसे ऐसे निरंतर ट्रेंड्स पकड़ने के लिए डिजाइन किया गया है जो एमएफ़आई पर ओवरसोल्ड और ओवरबॉट कंडीशंस का उपयोग करके कम रिस्क वाले एंट्री पॉइंट्स ढूँढता है। जो कंडीशंस अलर्ट के लिए सेट की जा सकती हैं वे निम्न हैं-

लॉन्ग एंट्री
जब निम्न कंडीशंस पूरी हों तब लॉन्ग एंट्री करनी चाहिए:

डेली चार्ट
1- सुपर ट्रेंड (10,4) इंडिकेटर प्राइज़ से कम हो और

2-एमएफ़आई(9) 25 या 50 के ऊपर हो

स्टॉप लॉस और एक्ज़िट कंडीशन
सुपरट्रेंड प्राइज़ के ऊपर निकाल जाता है।

शॉर्ट एंट्री
जब निम्न कंडीशंस पूरी हों तब शॉर्ट एंट्री करनी चाहिए:

डेली चार्ट
1- सुपरट्रेंड (10,4) इंडिकेटर प्राइज़ से ऊपर हो और

2- एमएफ़आई(9) 75 या 50 के नीचे हो

स्टॉप लॉस
सुपरट्रेंड प्राइज़ के नीचे हो।

एक्ज़िट कंडीशन

शॉर्ट साइड पर पैसा बनाने के लिए आपको फुर्तीला होना पड़ता है। मैं प्रॉफ़िट बुक करने के लिए ओवर सोल्ड होने के बाद एमएफ़आई के 20 या 25 के ऊपर होने का सिग्नल उपयोग करता हूँ।

इस स्ट्रैटेजी में मैंने एमएफ़आई(9) की कंडीशन लचीली रखी है। मैं आपको आपकी रुचि के अनुसार स्टॉक्स को एमएफ़आई(9) की 20 से 50 तक वैल्यू के लिए बैक टेस्ट कर उसके अनुसार अलर्ट सेट करने सलाह देता हूँ। क्योंकि यह एक लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी है तो एमएफ़आई अलग-अलग सिक्योरिटीज के साथ अलग व्यवहार कर सकता है।

केस स्टडी

हैवेल्स के लिए मैंने लॉन्ग और शॉर्ट दोनों के लिए एमएफ़आई(9) की वैल्यू 50 क्रॉस ओवर के रूप में चुनी है। यदि हम हैवेल्स के पिछले साल के डेली चार्ट्स देखें तो स्ट्रैटेजी ने केवल 2 सिग्नल बताए हैं।

  • 21 सितंबर 2018: 635.05 पर शॉर्ट
  • 11 अक्टूबर 2018: 611 पर शॉर्ट कवर हुआ
  • 01 जनवरी 2019: 694.80 पर लॉन्ग
  • 10 जुलाई 2019: 726.55 पर बेचा गया

दोनों ट्रेड्स लाभदायक थे।
इसकी तुलना में, यदि आपने बाय या होल्ड स्ट्रैटेजी या शुद्ध सुपरट्रेंड का पालन किया होता तो इसी समय में आपको नेगेटिव रिटर्न मिलता।

कंक्लुजन

एमएफ़आई एक बढ़िया मोमेंटम ऑसिलेटर है जिसे सुपर ट्रेंड या फिर एक मूविंग एवरेज क्रॉस ओवर सिस्टम जैसे ट्रेंडिंग इंडिकेटर के साथ उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, मैं कभी इसे अकेले एक इंडिकेटर के रूप में उपयोग करने की सलाह नहीं दूंगा क्योंकि एक अकेले इंडिकेटर के रूप में इसमें गलत सिगनल्स पैदा करने की प्रवृत्ति होती है।

इंडिकेटर स्ट्रैटेजीज पर एक क्लोजिंग नोट

आपको यह याद रखना चाहिए कि जो भी स्ट्रैटेजी या इंडिकेटर आप चुने, उसे आपकी ट्रेडिंग की स्टाइल और साइकोलोजी के साथ आसानी से काम करना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि आपकी स्टाइल डे-ट्रेडिंग है तो 100 या 200 दिन के मूविंग एवरेज का उपयोग बहुत लंबा हो सकता है। यदि आपका ओरिएंटेशन लॉन्ग टर्म है तो एक 5 या 10 दिन के मूविंग एवरेज का उपयोग शायद आपके लिए काम न करे।

इंडिकेटर्स तभी उपयोगी होते हैं जब आप उनकी लिमिटेशन्स समझ सकें। जो भी इंडिकेटर आप चुनते हैं सुनिश्चित करें कि आप उस पर पूंजी लगाने से पहले उसे अच्छे से अलग अलग तरह के मार्केट्स में बैक टेस्ट या पेपर ट्रेड करके देख लें।

शुभकामनाए!