मैं उम्मीद करता हूँ कि इंडिकेटर्स के साथ ट्रेड करने की इस सीरीज़ को पढ़ने में आपको उतना ही मज़ा आया होगा जितना मुझे इसे लिखने में आया है। इस सिरीज़ के आखरी से पहले और आखरी एडिशन में मैं कुछ ऐसे इंडिकेटर्स पर फोकस करूंगा जिन पर मैंने अभी तक चर्चा नहीं की है।

इसे हफ्ते मैं पहले ऑन वॉल्यूम बैलेंस (ओबीवी) पर आपका ध्यान आकर्षित करवाना चाहता हूँ। यह उन मोमेंटम इंडिकेटर्स में से एक है जो प्राइज़ के बदलाव को वॉल्यूम से संबन्धित कर सकते हैं। यह विशिष्ट रूप से प्राइज़ के कसॉलिडेशन के समय में अक्युमुलेशन या डिस्ट्रीब्यूशन का पता लगाने में उपयोगी है।

बेक्ग्राउन्ड

इस इंडिकेटर को अतीत के टेक्निकल एनालिस्ट और मार्केट गुरु "जोय ग्रानविले" ने देवलप किया था। इस टूल का विस्तरत विवरण उनकी किताब “ न्यू स्ट्रैटेजी ऑफ डेली स्टॉक मार्केट टाइमिंग फॉर मैक्सिमम प्रॉफिट्स” में है। इसी किताब से हमें ट्रेडिंग का सिद्धांत “वॉल्यूम से पहले प्राइज़ आता है“ मिलता है।

केल्क्युलेशन

ऑन बैलेंस वॉल्यूम की कैल्क्युलेशन के लिए जब प्राइज़ क्लोज़ अप होती है तो एक क्यूमूलेटिव टोटल में वॉल्यूम जोड़ी जाती है और जब प्राइज़ क्लोज़ डाउन होती है तो सबट्रैक्ट की जाती है। जब प्राइज़ में कोई बदलाव नहीं आता है तब तो ओबीवी क्यूमूलेटिव टोटल में कोई बदलाव नहीं किया जाता है। जैसा दिखाया गया है यह वॉल्यूम का रनिंग एग्रीगेट है।

ओबीवी फॉर्मूला:

यदि आज का क्लोज़,पिछले क्लोज़ से ज़्यादा है: पिछली क्यूमूलेटिव वॉल्यूम+ आज की वॉल्यूम= ओबीवी

यदि आज का क्लोज़,पिछले क्लोज़ से कम है: पिछली क्यूमूलेटिव वॉल्यूम-आज की वॉल्यूम= ओबीवी

इंडिकेटर हमें बताता है की स्मार्ट मनी को बेस्ट मालूम है और यह मार्केट का नेतृत्व करता है। ऑब्ज़र्वेशन से यह बात की पुष्टि होती है कि प्राइज़ में बदलाव से पहले ओबीवी में बदलाव होता है। ओबीवी और प्राइज़ की चाल समान होगी।

बढ़ता हुआ ट्रेंड: ओबीवी और प्राइज़→दोनों हाइर हाइज़ और लो बनाते हैं

गिरता हुआ ट्रेंड: ओबीवी और प्राइज़→दोनों लोअर हाइज़ और लो बनाते हैं।

बैकग्राउंड ट्रेंड- ओबीवी साइड्वेज़

जब भी ओबीवी एक बढ़ते हुए या गिरते हुए ट्रेंड में बदलता है तो ब्रेकआउट होता है। क्योंकि ओबीवी ब्रेक आउट सामान्य रूप से प्राइज़ ब्रेक आउट से पहले होते हैं इसीलिए आपको ओबीवी के ऊपर वाले हिस्से में और ओबीवी के छोटे नकारात्मक पहलू में खरीद के लिए तैयार होना चाहिए।

इंट्राड़े ट्रेडिंग में ओबीव

ऊपर दिए गए क़ॉन्सेप्ट्स को समझने के लिए आप वोल्टास के इस 15-मिनट के चार्ट को पढ़ सकते हैं। आप नेगेटिव डाइवर्जेंसेस और चार्ट्स का विश्लेषण करके निश्चित रूप से ट्रेडिंग का पता लगा सकते हैं। हालांकि, इन स्ट्रैटेजीज को ऑटोमेट करना एक चुनौती है।

ओबीवी की तुलना वॉल्यूम से करना

ओबीवी के साथ किया गया एक अन्य महत्वपूर्ण अध्ययन है वॉल्यूम बार के साथ इसकी तुलना करना। जब एक निरंतर ट्रेंड के बाद कैन्डल की वॉल्यूम ओबीवी से बहुत ज़्यादा होती है तो यह एक संभावित ट्रेंड रिवर्सल का सूचक होता है। सिग्नल की पुष्टि करने के लिए इसे किसी अन्य इंडिकेटर के साथ कम्बाइन करना पड़ेगा।

विलियम्स%आर को ओबीवी के साथ कैसे उपयोग किया जाता है जानने से पहले हम विलियम्स%आर के बारे में जानते हैं।

विलियम्स%आर

विलियम्स परसेंट रेंज या केवल %आर को इसका नाम इसके डेवलपर "लैरी विलियम्स" से मिला है। यह फास्ट स्टोक़ैस्टिक ओसिलेटर का विपरीत है।

यदि आपको याद हो तो फास्ट स्टोकैस्टिक की गणना लुक बैक पीरियड के लो के साथ प्राइज़ की तुलना करके की जाती है। इसके विपरीत, %आर, प्राइज़ की तुलना हाई के साथ करता है।

परिणामस्वरूप, फास्ट स्टोकैस्टिक ऑसिलेटर और विलियम्स %आर सटीक मूवमेंट उत्पन्न करते हैं, केवल स्केलिंग अलग-अलग है। %आर 0 से -100 के बीच झूलता है जहां -20 ओवरबॉट लेवल है और -80 ओवरसोल्ड लेवल। विलियम्स %आर विपरीतता को सही करने के लिए रॉ वैल्यू को -100 से मल्टीप्लाय करता है।

यह इंडिकेटर काम कैसे करता है?

  • -50 मिड-पॉइंट है। जब %आर -50 से ऊपर जाता है तो यह सिग्नल करता है कि प्राइजेस उस पीरियड के हाई-लो रेंज के ऊपरी आधे हिस्से में ट्रेड कर रही हैं। (बुलिश)। इसके विपरीत -50 के नीचे के आधे हिस्से में ट्रेड कर रही हैं। (बियरिश)।यह बाटा इंडिया के चार्ट में स्पष्ट दिख रहा है।
  • -20 के ऊपर की रीडिंग से पता चलता है कि इन्स्ट्रमन्ट अपने 14-दिन के हाई-लो रेंज के आसपास ट्रेड कर रहा है। -80 से नीचे की रीडिंग तब आती है जब यह अपनी हाई-लो रेंज के लो के पास ट्रेड करता है। डी-फॉल्ट सेटिंग्स में -20 को ओवरबॉट थ्रेशोल्ड के रूप में और -80 को ओवर सोल्ड थ्रेशोल्ड के रूप में उपयोग करती हैं। इन लेवल्स को सिक्योरिटी की विशेषताओं के आधार पर एडजस्ट किया जा सकता है।
  • जब %आर प्राइज़ के साथ नहीं बढ़ता या %आर प्राइज़ के साथ कम नहीं होता तो इसे नेगेटिव डायवर्जेंस दिखानेवाला कहते हैं। यह एक संभावित रिवर्सल दिखाता है जैसा की बाटा इंडिया के चार्ट में दिख रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखें कि भले ही कोई सिक्योरिटी ओवरबॉट या ओवर सोल्ड, तो यह इस स्थिति में एक लंबे समय तक रह सकता है।

ऑन बैलेंस वॉल्यूम और विलियम्स %आर (%आर) के साथ ट्रेडिंग सिस्टम

  1. लॉन्ग एंट्री
    जब यह कंडीशंस पूरी होने पर ही लॉन्ग एंट्री लें:

15 मिनट का चार्ट

1- ओबीवी में ब्रेक आउट ऊपर की ओर है- हर स्टॉक के लिए चार्ट के आधार पर ब्रेक आउट लेवल्स सेट करें और

2- %आर(14) -70 के ऊपर  हो और

3- एक ग्रीन कैन्डल।

स्टॉप लॉस
पिछले स्विंग का लो

टार्गेट
एक बार स्टॉप लॉस के बराबर प्रॉफ़िट पाने के बाद, स्टॉप लॉस को ब्रेक ईवन पर बढ़ाएँ और 1x स्टॉप लॉस के साथ ट्रेल करें। स्टॉप लॉस 3x पर पहुँचने के बाद प्रॉफ़िट बुकिंग पर विचार करें।

2- शॉर्ट एंट्री
यह कंडीशंस पूरी होने पर ही शॉर्ट एंट्री लें:

15 मिनट का चार्ट

  1. ओबीवी का ब्रेकआउट नीचे की ओर है- हर स्टॉक के लिए चार्ट के आधार पर ब्रेकआउट लेवल्स सेट करें और
  2. %आर(14) -30 के नीचे है और
  3. एक ग्रीन कैन्डल।

स्टॉप लॉस
पिछले स्विंग का हाई

टार्गेट
एक बार स्टॉप लॉस के बराबर का प्रोगीत पार हो जाने पर स्टॉप लॉस को ब्रेक ईवन पर मूव करें और 1x स्टॉप लॉस के साथ ट्रेल करें। स्टॉप लॉस 3x पर पहुँचने के बाद प्रॉफ़िट बुकिंग पर विचार करें।


नीचे दिया गया हैवेल्स का 15 मिनट का चार्ट आपको दिखाता है कि ओबीवी में नेगेटिव डाइवर्जेंस कैसे देखना है और अपनी लॉन्ग और शॉर्ट एंट्री का समय निश्चित करना है।

ओबीवी के नेगेटिव डाइवर्जेंस दिखाने के बाद 14/08/2019 को सुबह 10.15 बजे खरीद ट्रिगर होती है जिसके बाद %आर में कन्फर्मेशन और प्राइज़ में ग्रीन कैन्डल।642 के स्टॉप लॉस के नीचे, एंट्री प्राइज़ 649.80 है। स्टॉक ऊपर जाता है और कोई भी स्टॉक के 675 को पार करने या उसके नीचे रहने पर प्रॉफ़िट बुक कर सकता है।

पहले हुए नेगेटिव डाइवर्जेंस के बाद ओबीवी के ब्रेक डाउन के बाद शॉर्ट एंट्री 20/08/2019 को दोपहर 2.30 बजे शॉर्ट सेल ट्रिगर करती है। इसकी पुष्टि %आर और प्राइज़ करते हैं। हम 679 के स्टॉप लॉस के साथ 687 पर शॉर्ट करते हैं।

स्टॉक एक अस्थायी ब्लिप करता है, लेकिन नीचे की ओर टंबलिंग करने से पहले एक व्हिसकर के साथ हमारे स्टॉप लॉस को बचाता है।अनुभवी ट्रेडर्स हमेशा इस तरह की फेक आउट मूव्स से बचने के लिए स्टॉप लॉस को स्विंग हाई और लो से कुछ टैक्स ऊपर या नीचे रखने की सलाह देते हैं।

ओबीवी के साथ अलर्ट्स की लिमिटेशन्स

साधारण अलर्ट्स स्ट्रैटेजी की केवल %आर स्थिति के लिए सेट किया जा सकता है। जब आपके अलर्ट्स ट्रिगर हों तो ट्रेड लेने से पहले आपको ओबीवी और कैन्डल को ऑब्जर्व करना होगा।

क्लोजिंग नोट्स

हालांकि, ओबीवी के साथ स्टॉक्स पर अलर्ट सेट करना चुनौतीपूर्ण होता है, यह मार्केट के हाई और लो बताने में विशिष्ट रूप से उपयोगी होता है आगे आनेवाले नाइरो रेंज ट्रेडिंग पीरियड की दिशा पहले से बताने में मदद करता है। मार्केट के टॉप्स और बॉटम्स में ओबीवी द्वारा प्राइज़ की पुष्टि ना करना एक विश्वसनीय अलार्म है। इसी तरह इंट्रा डे ओबीवी आपकी एंट्री ओर एग्ज़िट्स को  बेहतर करने के लिए संकेत दे सकता है।

स्मार्ट मनी को ट्रैक करने और अपने इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो की परचेसेस के टाइमिंग को बेहतर करने के लिए वीकली चार्ट्स के साथ ओबीवी को एक्सप्लोर करें।