"बिल्डिंग ट्रेडिंग स्ट्रैटेजीएस" के इस दूसरेअध्याय में, हम एक प्रवृत्ति इंडीकेटर्स और स्टोकेस्टिक के रूप में पैराबोलिक सार का उपयोग करके स्विंग ट्रेडिंग सीखने पर अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं।

हमारे इंट्रोडक्टरी पोस्ट में, हमने आपको उन दिशा निर्देशों पर एक अवलोकन दिया, जिनका आपको चार्ट पर इंडिकेटर का उपयोग करने और कंबाइन करने के लिए पालन करने की आवश्यकता है। यदि आपने पिछला लेख नहीं पढ़ा है, तो आपको शायद इससे समझने से पहले उसका निरक्षण करना होगा।

आज, हम एक ट्रेंड इंडिकेटर (पैराबोलिक सार) और एक गति सूचक ( स्टोकेस्टिक) के साथ हमारी पहली इंडिकेटर कॉम्बिनेशन स्ट्रेटेजी का निर्देशन करेंगे । स्ट्रेटेजी का डिज़ाइन इस तरह से किया गया है की  कोई उस दिशा में गति प्राप्त करने के बाद मुख्य प्रवृत्ति की दिशा में प्रवेश कर सके। यह शुद्ध रूप से एक स्वनिर्णयगत स्ट्रैटेजी है जिसे हर घंटे के चार्ट पर सिगनल्स के लिए लगाया जाता है। यह एक शॉर्ट टर्म स्ट्राइटेजी है जो इंट्रा डे ट्रेड के साथ-साथ  5-7 दिनों के स्विंग ट्रेड के लिए बढ़िया होती है।

उपयोग किए जानेवाले इंडिकेटर्स

1.  स्टोकेस्टिक ओसिलेटर को तेज़ चलनेवाली लाइन (%K) के लिए 14 के डिफ़ाल्ट पैरामीटर पर सेट किया जाता है उर धीरे चलनेवाली लाइन (%D) के लिए 3 पर। अपनी स्ट्रैटेजी के लिए हम नियमित  स्टोकेस्टिक के ओवरबॉट (80) और ओवरसोल्ड (20) के स्तरों के साथ हम 50 पर ओसिलेटर की मध्य-बिन्दु को मॉनिटर करेंगे।

2. हमारी स्ट्रैटेजी के लिए  पैराबोलिक सार (0.05, 0.5) पर है। मैंने पैराबोलिक सार की स्टेप और मैक्स एएफ़ लेवल को (0.02,0.2) के डिफ़ाल्ट से बदल दिया है क्योंकि इंडिकेटर की संवेदनशीलता को बढ़ाकर हमें ट्रेंड रिवर्सल के सिग्नल तेज़ी से और लगातार मिलते हैं।क्योंकि हमने 2 इंडिकेटर्स को कम्बाइन किया है तो हम केवल पीएसएआर पर कार्यवाही नहीं कर रहे तो हमें तड़के हुए सिगनल्स मिलने का खतरा नहीं है।

स्ट्रैटेजी
ट्रेड की पुष्टि करने के लिए यह स्ट्रैटेजी स्टोकेस्टिक ओसिलेटर का उपयोग करती है और ट्रेंड का पता लगाने के लिए पीएसएआर इंडिकेटर का। इसका कारण यह है कि 50 का निशान मोमेंटम ऑसिलेटर का मध्य बिन्दु है। ओवरसोल्ड (20) के स्तर और 50 के निशान के बीच बढ़ते  स्टोकेस्टिक मूल्य को तेज़ी माना जाता है, जबकि ओवरबॉट (80) के स्तर और 50 के निशान के बीच घटते  स्टोकेस्टिक मूल्य को मंदी माना जाता है।

सतर्क व्यापारी कभी-कभी बहुत सारी समय अवधियों का उपयोग बड़े ट्रेंड की दिशा जानने के लिए करते हैं। हालांकि, हम इस स्ट्रैटेजी में इसका उपयोग नहीं करेंगे।

लॉन्ग एंट्री
निम्न परिस्थितियों में लॉन्ग एंट्री की जानी चाहिए:

हर घंटे का चार्ट

1. तेज़  स्टोकेस्टिक ओसिलेटर लाइन (%K) 20 के ऊपर और 50 के नीचे है।

2. %K, %D से ज़्यादा है,  स्टोकेस्टिक बढ़ते हुए ट्रेंड में है।

3. पिछली 5 बार में पैराबोलिक सार इंडिकेटर सिग्नल बुलिश सिग्नल के पार गया हो।

4.  अगली कैन्डल खुलने पर लॉन्ग ट्रेड खोलें।

स्टॉप लॉस
स्टॉप लॉस को स्विंग कम या 2% के नीचे, जो भी व्यापार की शुरुआत में मौजूदा बाजार मूल्य से अधिक है, पर रखें । इस स्टॉप लॉस को मार्केट के साथ ट्रैक किया जा सकता है।

टेक प्रॉफ़िट
टीपी बिंदु को आपके प्रवेश मूल्य से 7% तक सेट किया जा सकता है, यह स्थिति व्यापारियों के लिए आदर्श हो सकती है।हालांकि,ओसिलेटर के ओवर बॉट लेवल्स पर पहुँच पलटने का इंतज़ार करने से पहले पूरे या आधे प्रॉफ़िट कमाना भी पहले विशेष रूप से इंट्राडे व्यापारियों के लिए प्रॉफ़िट कमाने का तरीका हो सकता है।

शॉर्ट एंट्री
निम्न परिस्थितियों में शॉर्ट एंट्री की जानी चाहिए-

हर घंटे का चार्ट

1. तेज़  स्टोकेस्टिक ओसिलेटर लाइन (%K) 80 से नीचे और 50 के ऊपर है।

2. %K, %D से कम है। स्टोकेस्टिक कम होते ट्रेंड में है।

3. पिछली 5 बार में पैराबोलिक सार इंडिकेटर सिग्नल बियरिश सिग्नल के पार गया हो।

4. अगली कैन्डल खुलने पर शॉर्ट ट्रेड खोलें।

ऊपर के स्क्रीनशॉट में लाल एरोज से भी शॉर्ट ट्रेड सेटअप दर्शाया गया है।

यहाँ, हम देखते हैं कि ट्रेड एंट्री खुद-ब-खुद अच्छी तरह से सेट है और स्टॉक भी ओवर सोल्ड क्षेत्र में आने से पहले स्टॉक अच्छे से चला। यहाँ ट्रेडर ट्रेड एग्जिट सेट कर सकता है।

स्टॉप लॉस  
पोज़िशनल ट्रेडर को अपने एंट्री लेवल से 2% ऊपर या स्विंग हाई से ऊपर, जो भी ज़्यादा हो पर स्टॉप लॉस सेट करना चाहिए।

टेक प्रॉफ़िट
टेक प्रॉफिट को या तो 7% के निश्चित मूल्य पर सेट किया जा सकता है या इंट्राडे ट्रेडर्स प्रॉफ़िट लेने से पहले स्टोकेस्टिक ओसिलेटर के ओवरसोल्ड लेवल पर पहुंचने का इंतजार कर सकते हैं।

बैक टेस्टिंग
हमने जिन शेयरों का परीक्षण किया, उनमें से औसतन, इस स्ट्रैटेजी ने एक कैलेंडर वर्ष में प्रति शेयर लगभग 20 सिग्नल उत्पन्न किए। 3 में से 1 ट्रेड लाभदायक था। हालांकि, 3.5: 1 का रिवार्ड टू रिस्क रेश्यो सुनिश्चित करता है कि स्ट्रैटेजी न केवल लाभदायक रही, बल्कि कई शेयरों में रिटर्न को बेहतर बनाए रखा।

उदाहरण के लिए: बाय एंड होल्ड के लिए 28% की तुलना में इस स्ट्रैटेजी के साथ कैलेंडर वर्ष में एशियन पेंट्स ने 56% का रिटर्न पाया । टाटा स्टील ने बाय एंड होल्ड के -7% की तुलना में 21% रिटर्न पाया।

निष्कर्ष
डे ट्रेडर्स के लिए इस व्यापार की अत्यंत अल्पकालिक प्रकृति का मतलब है कि व्यापारी को इस व्यापार पर  शुरू से अंत तक लगातार नज़र रखनी होती है । हालांकि स्थिति व्यापारी अपने स्टॉप लॉस के स्तर और लक्ष्य के स्तर को दिन के आधार पर निर्धारित कर सकते हैं और कभी-कभी व्यापार की निगरानी कर सकते हैं।

इस स्ट्रैटेजी को एक उच्च समय-सीमा (दैनिक) पर एक अतिरिक्त ट्रेंड इंडिकेटर के साथ जोड़कर इस स्ट्रैटेजी के  संकेतों की विश्वसनीयता में सुधार करने के लिए उपयोग किया जा सकता है।

कोई भी आगे बढ़कर एमपी पर इस स्ट्रैटेजी के अनुरूप अलर्ट सेट कर सकता है और इस स्ट्रैटेजी को खुद टेस्ट कर सकता है।

हमारा सुझाव है कि इस आइडिया को अपने ट्रेडिंग प्लान में फिट करके देखें। पैरामीटर्स सोने में सेट नहीं किए गए हैं, इनके साथ प्रयोग करें। इन्हें अलग-अलग स्टॉक और अलग-अलग समय में बहतर परिणामों के लिए ट्वीक किया जा सकता है।

अगले सप्ताह में, हम इंडिकेटर्स की अगली जोड़ी को देखेंगे, बोलिंगर बैंड और आरएसआई कैसे सबसे अच्छा तथा एक लाभदायक व्यापार प्रणाली के निर्माण के लिए जोड़ा जा सकता है इसका निर्देशन करेंगे। तब तक के लिए हमारे साथ जुड़े रहिये।