डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स एक मोमेंटम इंडेक्स है जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया क्जाता है कि एक असेट ओवर बॉट है या ओवर सोल्ड। इसे पहली बार मई 1993 में तुषार चंदे और स्टेनली क्रोल ने स्टॉक एंड कमोडिटीज़ मैगज़ीन में सुझाया था।

अधिकतर पक्षों में यह रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) के समान ही है। इन दोनों में मुख्य अंतर यह है कि आरएसआई अपनी गणना में आमतौर से तय पीरियड्स (सामान्यतः 14) का उपयोग करता है जबकि डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स परिवर्तनशीलता(वोलैटिलिटी) के अनुसार अलग-अलग पीरियड्स, आमतौर पर पांच और 30 के बीच का उपयोग करता है ।

हमने मार्केट पल्स एप पर डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स कोसंक्षेप में संदर्भित करने के लिए  डायमोई का उपयोग किया है लेकिन इसे डायरेक़्शनल मूवमेंट इंडेक्स से भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।

चलिए देखते हैं कि डायमोई को कैसे उपयोग करना है और इसकी सीमाएं क्या हैं। मैंने आर्टिकल के अंत में इंडिकेटर की कैल्क्युलेशन मेथड भी शेयर की है।

डायमोई इंडिकेटर का उपयोग कैसे करें?

1.  व्याख्या आरएसआई जैसी ही होती है। 30 से कम रीडिंग्स ओवर सोल्ड दर्शाती हैं और 70 से ऊपर का स्तर ओवर बॉट दर्शाता है।इंडिकेटर 0 और 100 के बीच झूलता है।

2. इंडिकेटर सिक्योरिटी की बढ़ती परिवर्तनशीलता((वोलैटिलिटी)  के साथ कम समयावधि का प्रयोग करता है जो इसे आरएसआई से ज़्यादा प्रतिक्रियाशील बनाता है। इसीलिए ट्रेडर्स को आरएसआई की तुलना में जल्दी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स मिलते हैं।

3. अप ट्रेंड के दौरान इंडिकेटर का 30 से नीचे जाना और फिर ऊपर उठना ट्रेडर के लिए लॉन्ग ट्रेड को ट्रिगर करने का संकेत होता है।

4. डाउन ट्रेंड के दौरान इंडिकेटर का 70 से ऊपर उठाना और फिर इसके नीचे आना शॉर्ट ट्रेड ट्रिगर करने का संकेत है।

5. 30 और 70 सामान्य स्तर हैं और ट्रेडर इन्हें बदल सकता है। उदाहरण के लिए एक ट्रेडर इसकी जगह 20 और 80 का उपयोग कर सकता है।

6. यह इंडिकेटर मुख्य सपोर्ट/रेजिस्टेंस क्षेत्रों और सिक्योरिटी के पीछे लौटनेवाले स्तरों में भी ज़्यादा उपयोगी होता है क्योंकि सिक्योरिटी अधिक परिवर्तनशील होकर संभावित ट्रेड सिगनल्स देते हैं।

डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स का उपयोग कैसे करें?

नीचे दिए गए चार्ट में सर्कल किए गए क्षेत्र डायवर्जेंसेस के साथ मोमेंटम इंडेक्स का उपयोग करके हीरो मोटो कॉर्प के संभावित ट्रेड सेटअप्स दिखाते हैं।  पहला और तीसरा सर्कल नेगेटिव डायवर्जेंस दिखाता है जहां प्राइज़ एक नया हाई बनाता है लेकिन डायमोई एक नीचा लो बनाता है। दूसरा सर्कल पॉज़िटिव डायवर्जेंस का मामला दर्शाता है जहां प्राइज़ के निचले लो से लौटने पर इंडिकेटर एक ऊंचा लो बनाता है।

यदि ट्रेड उनके खिलाफ जाए तो ट्रेडर्स नुकसान को रोकने के लिए शॉर्ट ट्रेड के लिए सबसे हाल के स्विंग हाई पर स्टॉप लॉस ऑर्डर सेट कर सकते हैं और लॉन्ग ट्रेड के लिए सबसे हाल के स्विंग लो पर।

डायमोई की सीमाएं

1. इंडिकेटर अतीत की प्राइज़ की गति को देखता है। यह स्वाभाविक रूप से भविष्यसूचक नहीं है।

2. हालांकि इंडिकेटर आरएसआई से कम पिछड़ता है फिर भी कुछ पिछड़ता है।

3. जब प्राइज़ कम हो रही हैं एक असेट लंबे समय तक ओवर सोल्ड क्षेत्र में रह सकता है। इंडिकेटर का ओवर सोल्ड क्षेत्र से बाहर निकलने का मतलब यह नहीं की प्राइज़ बहुत ज़्यादा बढ़ेगी। इसी तरह एक अप ट्रेंड के साथ,प्राइज़ लंबे समय तक ओवर बॉट रह सकती है और जब यह ओवर बॉट क्षेत्र से बाहर निकलती है तो ज़रूरी नहीं की प्राइज़ गिरेगी।

बेहतर परिणाम के लिए एक अतिरिक्त ट्रेंड अनुयायी इंडिकेटर के साथ  इसे उपयोग करने पर विचार करें।

डायमोई की गणना

डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स की गणना कैसे करें

डायनामिक मोमेंटम इंडेक्स आरएसआई फॉर्मूला का उपयोग करता है लेकिन हर आरएस कि गणना के लिए डीएमआई 5 और 30 के बीच बदलते हुए पीरियड का उपयोग करता है जबकि आरएसआई सामान्यतः 14 पर तय होता है। डीएमआई की गणना करते समय,आरएस की हर कैल्क्युलेशन के लिए निम्न स्टेप्स का पालन करें:

1. पिछली 5 क्लोजिंग प्राइजेस का स्टैण्डर्ड डीवीएशन कैलक्यूलेट करें।

2. स्टेप-1 में कैलक्यूलेट किए गए स्टैण्डर्ड डीवीएशन के 10 पीरियड्स का मूविंग एवरेज निकालें। यह StdA है।

3. Vi निकालने के लिए स्टेप-1 को  स्टेप-2 से भाग दें(डिवाइड)।

4. 14 को Vi से भाग दे कर TD निकालें। परिणाम में केवल पूर्ण संख्या ही लें क्योंकि यह समय है जो फ्रेक़्शंस या दशमलव(डेसीमल्स) में नहीं हो सकता।

5. TD 5 और 30 के बीच सीमित है। यदि यह 30 से ऊपर है तो 30 का प्रयोग करें। यदि यह 5 से कम है तो 5 का प्रयोग करें। TD, आरएस की गणना में प्रयोग होनेवाले पीरियड्स हैं।

6. TD द्वारा निर्धारित किए गए पीरियड्स का उपयोग करके आरएस की गणना करें।

7. हर पीरियड के अंत में दोहराएँ।